स्ववृत्त-लेखन

प्रस्तावना
प्रतिस्पर्धा के वर्तमान युग में अपने व्यक्तित्व एवं योग्यताओं को इस प्रकार रखना ताकि स्वयं को श्रेष्ठ स्थापित किया जा सके, यह एक आवश्यकता भी है और चुनौती भी इस संबंध में, स्ववृत्त एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिस प्रकार एक सुंदर चेहरा सबको आकर्षित करता है उसी प्रकार एक अच्छा स्ववृत्त भी सबको प्रभावित करता है।
स्ववृत्त का अर्थ एवं स्वरूप
स्व का अर्थ हैं अपना और वृत्त का अर्थ है घेरा या चारों ओर । स्ववृत्त का शाब्दिक अर्थ हुआ अपने चारों ओर दूसरे शब्दों में अपने चारों ओर या आसपास की अथवा अपने से संबंधित जानकारी स्ववृत्त कहलाती है। अपने निजी जीवन एवं व्यक्तित्व से संबंधित महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी सूचनाएँ देना स्ववृत्त लेखन कहलाता है।
नौकरी या छात्रवृत्ति के लिए आवेदन-पत्र लिखते समय, विवाह के लिए अथवा किसी विशेष प्रयोजन, जैसे, किसी पुरस्कार या पदोन्नति आदि के लिए नामांकन पत्र भरते समय स्ववृत्त देने की आवश्यकता होती है। स्ववृत्त वास्तव में अपनी निजी, शैक्षिणिक, कार्य संबंधी एवं इतर योग्यताओं का संक्षिप्त लेखा-जोखा होता है। स्ववृत्त लिखते समय निम्नलिखित बातों विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि सभी जानकारी स्पष्ट रूप से उसमें आ जाएँ-
- नाम – सर्वप्रथम साफ अक्षरों में अपना पूरा नाम देखा जाता है।
- जन्म-तिथि – जन्म-तिथि स्ववृत्त का महत्त्वपूर्ण अंग है। कई बार किसी कार्य के लिए आयु सीमा निर्धारित होती है, तो उसकी पुष्टि के लिए जन्म-तिथि देना अनिवार्य होता है। अन्यथा भी आयु से किसी के अनुभव एवं कार्य करने की क्षमता को आंका जा सकता है। अत: सही जन्म-तिथि देना महत्त्वपूर्ण होता है।
- माता-पिता का नाम – यदि पिता और/या माता का नाम पूछा गया हो तो वह लिखा जाता है।
- स्थायी/संपर्क का पता – माता-पिता का नाम यदि न पूछा गया हो जन्म तिथि के तुरंत – बाद पता लिखा जाता है। सामान्यतः वह पता लिखा जाता है जिस पर स्ववृत्त लेखक अपने पत्र प्राप्त करना चाहता है। यदि संपर्क का पता और स्थायी पता अलग-अलग हों तो सम्पर्क के पते के बाद स्थायी पता भी लिखा जाता है।
- शैक्षणिक योग्यता – यह स्ववृत्त का महत्त्वपूर्ण भाग है। इसमें सीनियर सेकेण्डरी या इंटर से आरम्भ करके क्रमश: बी.ए., एम.ए., बी.एड. या अनुवाद में प्रमाण पत्र आदि शैक्षिक एवं व्यावसायिक शिक्षा संबंधी सूचना दी जाती हैं। ये परीक्षाएँ किस बोर्ड या विश्वविद्यालय से, किस वर्ष में, कितने नम्बरों के साथ, किस स्कूल, कॉलेज या संस्था से पास की हैं उनका विवरण दिया जाता है ।
- अनुभव संबंधी सूचना – यदि नौकरी के लिए आवेदन पत्र के साथ स्ववृत्त भेजा जा रहा है तो, जिस पद या कार्य के लिए आवेदन पत्र भेजा जा रहा है, उससे संबंधित पूर्ववर्ती अनुभव लिखा जाता है। किस संस्था में कब से कब तक कितने समय के लिए किस पद पर कार्य किया है, इसका ब्यौरेवार अल्लेख किया जाता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के शोध कार्यों, सामाजिक क्रिया-कलापों आदि का कोई अनुभव हो तो उसे भी दिया जाता है।
- पाठ्येतर क्रिया-कलापों संबंधी सूचना – शैक्षिक संस्थाओं या अनेक निजी क्षेत्र की संस्थाओं में निर्धारित दैनिक कार्यों के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों या क्रिया-कलापों को भी महत्त्व दिया जाता है। शैक्षिक योग्यता एवं कार्य-संबंधी अनुभव के अतिरिक्त यदि सांस्कृतिक या खेलकूद संबंधी गतिविधियों में रूचि एवं अनुभव हो तो उसका उल्लेख भी स्ववृत्त में अवश्य किया जाता है। इस प्रकार के विवरण आवेदक के व्यक्तित्व को विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण बनाते हैं और कुछ संस्थाएँ इस प्रकार की योग्यताओं को उचित महत्त्व भी देती हैं।
- अन्य सूचना – ऊपर दिए गए बिंदुओं में वर्णित जानकारी के अतिरिक्त ( कोई सूचना शेष रह जाती है, तो वह इस स्थान पर लिखी जाती है। विवाह आदि के पारिवारिक सदस्यों की जानकारी आदि दिए जाते हैं।
- संदर्भ – कई बार आवेदक के चरित्र या व्यक्तित्व के विषय में जानकारी प्राप्त करने या सामाजिक जिम्मेदारी की दृष्टि समाज के दो या प्रतिष्ठित व्यक्तियों के संदर्भ माँगे जाते हैं। इसमें संबंधित व्यक्तियों का नाम और पूरा पता दिया जाता है। स्ववृत्त में वही तथ्य एवं जानकारी विशेष रूप से दिए जाते हैं जो नौकरी प्राप्त करने में सहायक हों या आवश्यकतानुसार जो आवेदक की योग्यताओं पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हों।
स्ववृत्त के गुण
जैसा कि पहले स्पष्ट किया गया कि स्ववृत्त व्यक्ति के व्यक्तितव का आईना होता है। अतः व्यक्ति के जिस भी रूप को विशिष्टता देनी हो उसी के अनुसार स्ववृत्त लिखा जाना चाहिए। एक अच्छे स्ववृत्त में सामान्यतः कुछ विशेषताएँ होती हैं जिन पर यदि ध्यान दिया जाए तो आवेदक के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों को प्रभावकारी ढंग से रखा जा सकता है। ये गुण निम्नलिखित हैं-
- पूर्णता – नौकरी, विवाह या पुरस्कार जिस भी दृष्टि से स्ववृत्त लिखा जा रहा हो, उसके अनुसार सभी जानकारी स्ववृत्त में आ जानी चाहिए। हर दृष्टि से स्ववृत्त पूर्ण होना चाहिए, विषय से संबंधित सभी प्राथमिक सूचनाएँ स्ववृत्त में आ जानी चाहिए। विज्ञापन में सदि कोई विशेष बात पूछी गई हो तो उसका उल्लेख अवश्य किया जाना चाहिए।
- संक्षिप्तता – स्ववृत्त व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं उसके आस-पास का संक्षिप्त ब्यौरा होता है। उसमें अनावश्यक वर्णन या विस्तार से बचने का प्रयास करना चाहिए। सभी तथ्यों एवं सूचनाओं को संक्षेप में दिया जाना चाहिए। यूँ तो स्ववृत्त का कोई निश्चित आकार नहीं होता, परन्तु नौकरी, विवाह आदि के लिए तैयार किया जाने वाला स्ववृत्त सामान्यतः एक या दो पृष्ठों से अधिक नहीं होना चाहिए।
- प्रभावशाली – अच्छे स्ववृत्त का महत्त्वपूर्ण गुण है उसका प्रभावशाली होना । स्ववृत में सभी तथ्यों को इस प्रकार रखा जाना चाहिए ताकि प्राप्तकर्ता पढ़ते ही उससे प्र प्रभावित हो सके। प्रभावोत्पादकता के लिए स्ववृत्त सदैव अच्छी गुणवत्ता के सफेट कागज पर इलैक्ट्रॉनिक टाइपिंग या कम्प्यूटर से तैयार किया जाना चाहिए। रंगीन कागज का उचित प्रभाव नहीं पड़ता। यदि कहीं टाइपिंग या कम्प्यूटर की सुविधा न हो साफ अक्षरों में स्ववृत्त लिखा जा सकता है।
- प्रामाणिकता – स्ववृत्त में दी गई सभी जानकारी प्रमाणिक होनी चाहिए। तथ्यों एवं सूचनाओं की प्रामाणिकता के लिए प्रमाण पत्रों की सत्यापित प्रतियाँ साथ में संलग्न करी चाहिए। यदि किसी कारण तथ्य सही नहीं दिए हैं तो बाद में स्ववृत्त लेखक को कठिनाई आ सकती है।
- स्पष्ट एवं सरल भाषा – स्ववृत्त में स्पष्ट शब्दों में एवं सरल भाषा में सभी जानकारी दी जानी चाहिए ताकि प्राप्तकर्ता उसे ठीक से ग्रहण कर सके। उसमें अभिधापरक, सरल एवं सुबोध भाषा का प्रयोग करना चाहिए। स्ववृत्त में विद्धतापूर्ण भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए।
स्ववृत्त में नाम को अन्य अक्षरों से मोटा लिखना चाहिए ताकि वह स्पष्ट दिखाई दे। सामान्यतः भी स्ववृत्त अक्षर बहुत छोटे नहीं होने चाहिए। साफ एवं स्पष्ट अक्षरों में स्ववृत्त लिखा जाना चाहिए। स्ववृत्त में सभी महत्त्वपूर्ण तथ्यों एवं विषेशताओं को गहरा अथवा रेखांकित कर देना चाहिए। स्ववृत्त तैयार होने पर उसे एक बार अवश्य पढ़ लेना चाहिए या प्रूफ भी अवष्य एक बार पढ़ लेना चाहिए। व्याकरणिक या टंकण की अशुद्धियों से स्ववृत्त पढ़ने वाले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
स्ववृत्त के उदाहरण
स्ववृत्त आवेदन पत्र के मुख्य भाग के रूप में भी दिया जाता है और स्वतंत्र रूप से लिखकर आवेदन पत्र या नामांकन पत्र के साथ सलंग्न भी किया जाता है। यदि स्ववृत्त आवेदन पत्र का अंग है तो सभी जानकारी एक, दो, तीन करके या अलग-अलग अनुच्छेदों में बाँटकर क्रमबद्ध रूप में लिखी जाती है, यदि स्ववृत्त स्वतंत्र रूप से लिखा जा रहा है तो आवश्यकतानुसार उसे तालिका के रूप में या एक, दो, तीन करके कमबद्ध रूप में लिखा जा सकता है।
नीचे नौकरी के लिए दिए जाने वाले आवेदन पत्र के साथ तालिका रूप में लिखे गए स्ववृत्त का एक नमूना दिया जा रहा है-
स्ववृत्त
- नाम
- जन्मतिथि
- पिता / माता का नाम
- पता
- शैक्षणिक योग्यता
उत्तीर्ण परीक्षा | बोर्ड / विश्वविद्यालय | किस वर्ष परीक्षा उत्तीर्ण की | प्राप्तांक | श्रेणी मूलांक | स्कूल/कॉलेज/ संस्था का नाम |
6. अनुक्रम
संस्था का नाम | जिस पद पर कार्य किया | समय से तक | कुल अवधि |
निष्कर्ष
निष्कर्षत: हम कह सकते हैं कि स्ववृत्त लेखन का एक व्यक्ति के लिए बहुत महत्त्व रखता है, क्योंकि स्ववृत्त व्यक्ति के व्यक्तित्व और उसकी योग्यता को दर्शाता है। इसलिए उसका श्रेष्ठ होना आवश्यक है, वैसे भी यह युग प्रतिस्पर्धा का युग है। अतः स्ववृत्त लिखते समय या तैयार करते समय इस बात के लिए यहाँ बल दिया गया है कि स्ववृत्त आकर्षक हो और श्रेष्ठ हो। इस प्रकार व्यक्ति के योग्यता को श्रेष्ठ प्रमाणित करने में स्ववृत्त एक महत्त्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करता है।
[…] स्ववृत्त-लेखन […]