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dhwani sampraday ke pravartak

प्रमुख संप्रदाय (pramukh sampraday aur siddhant)

भारतीय काव्यशास्त्र का इतिहास लगभग दो हजार वर्षों की निरंतर चिंतन परंपरा का इतिहास है। काव्य की 'आत्मा' या उसके सबसे महत्वपूर्ण तत्व की खोज में आचार्यों ने विभिन्न दृष्टिकोण अपनाए, जिससे छह प्रमुख संप्रदायों का जन्म हुआ। इन संप्रदायों ने