हिंदी साहित्य की ओर एक कदम।
Browsing Tag

bhushan kavitt

भूषण कवित्त (B.Com) सप्रसंग व्याख्या

निम्नलिखित कवित्त बी.कॉम. प्रोग्राम के प्रथम वर्ष में लगे हुए हैं। इंद्र जिमि जंभ पर, बाड़व ज्यौं अंभ पर, रावन सदंभ पर रघुकुल राज है। पौन बारिवाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यों सहस्रबाहु पर राम द्विजराज है॥ दावा द्रुमदंड पर, चीता मृगझुंड

भूषण कवित्त संख्या: 409, 411, 412

(409) गरुड को दावा जैसे नाग के समूह पर दावा नागजूह पर सिंहसिरताज को। दावा पुरहूत को पहारन के कुल पर दावा सबै पच्छिन के गोल पर बाज को। भूषण अखंड अखंड महिमंडल में तम पर दावा राबिकिरनसमाज कोपूरब पछाँह देस दच्छिन तें उत्तर लौं जहाँ पातसाही