हिंदी साहित्य की ओर एक कदम।

Previous Year Question Paper, जनपदीय साहित्य, GE, Semester-5

0 767
Unique Paper Code62055502
Name of the Paperजनपदीय साहित्य (Janpadiye Sahitya)
Name of the CourseB.A. (Prog.) Hindi – GE
SemesterV
Duration3 Hours
Maximum Marks75

छात्रों के लिए निर्देश:

इस प्रश्न-पत्र के मिलते ही ऊपर दिए गए निर्धारित स्थान पर अपना अनुक्रमांक लिखिए।
सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

प्र1. जनपदीय साहित्य की अवधारणा स्पष्ट करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डालिए। (12)

अथवा

मौखिक साहित्य और समाज के संबंध पर प्रकाश डालिए।

प्र2. ऋतु संबंधी गीतों की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (12)

अथवा

वाचिक परम्परा में लोक गीतों का महत्त्व रेखाकित कीजिए।

प्र3. लोक गाथाओं का सामान्य परिचय लिखिए। (12)

अथवा

पाठ्यक्रम में निर्धारित किन्हीं दो लोककथाओं का सार लिखिए।

प्र4. ‘बिदेसिया’ लोक-नाट्य के सन्देश पर प्रकाश डालिए। (12)

अथवा

लोक-नाट्य माच का परिचय देते हुए उसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

प्र5. सप्रसंग व्याख्या कीजिए: (7+7)

(क) खेतन में लागी कटनिया हो राम।।
माथे क झूमर झलाझल झलके,
खनके कलइया, कंगनवा हो राम।।
मिलि जुलि के सखिया लाही बंध्वाओ।
भरै चलो घर की बवरिया हो राम।।
सासु, ननदिया बाट हेरत हैं,
सइयाँ की साजी सेजरिया हो राम।
खेतन में लागी कटनिया हो राम।

अथवा

होली बी खेलै ढपयी बजा के गलयिाँ में उड़ए गुलाल।
कहियो सुरैटण सै होली खेलण आवै नवाब।
हंसलो घड़ावै फिरंगी को लड़को कठलौ घड़ावै नवाब।
कहियो मुरैटण तै होली खेलण आवै नवाब।
ऐसी होली खेली मिरगानैणी म्हारा साफा की रखियों लहाज।

(ख) एक ढयाला रहै और एकु रहे पत्ता। जइ दूनों आप मैं सलाह कीन्हेसि कि बखत जरूरति एकु दुसरे के काम अइवे।… कहेवि कि जब पानी आवय तब तुम हमें बचै हौ औ जब आँधी आई तौ हम तुमैं बचाइये। दइब गति अइस भे कि आँधी पानी दूनों साथै आयगै। आँधी ते उड़िगा और पानी ते ढयाला गलिगे। कथा रहे सो होइगै।

अथवा

इंद्र कै बात सुनिकै भगवान का संतोषु भा और तय उड़ यमराज ते बोले – महाराज। यो तुम्हई गड़बड़ घोटाला कौन हउ। अब तुम्हीं येहका पव्यारौ। किरपा करिकै ई पापिन का फिर ते धरती माँ छाँड़ि आव, काहे ते, पाप गंगा के नहाए ते नहीं, अच्छे फरमन ते खतम हात है। अब किरपा करिकै अइस भूल न कीन्हेव।

प्र6. निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : (7+6)

(क) कटनी के गीत
(ख) कठपुतली
(ग) सारंगा सदावृक्ष
(घ) पहेलियाँ- बुझौवल

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