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रासो काव्य
रासो काव्य की पृष्ठभूमि
रासो काव्य से हमारा तात्पर्य आदिकालीन साहित्य की वीरगाथात्मक कृतियों से है। आदिकालीन साहित्य में रास ग्रंथ और रासो ग्रंथ दोनों प्रकार की रचनाओं की चर्चा मिलती है। रास साहित्य और रासो साहित्य का मुख्य अंतर!-->!-->!-->…
सिद्ध, नाथ एवं जैन साहित्य
सिद्ध साहित्य
सिद्ध साहित्य से हमारा तात्पर्य वजयान परंपरा के उन सिद्धाचार्यों के साहित्य से है, जो अपभ्रंश के दोहे तथा चर्यापद के रूप में उपलब्ध है।
सिद्धों ने प्रबंध काव्य और खंडकाव्य के स्थान पर गीति और मुक्तक काव्य में रचना की!-->!-->!-->!-->!-->…
हिन्दी साहित्य: काल विभाजन और नामकरण
हिन्दी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण सामान्यतः आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के इतिहास से ही ग्रहण किया जाता है। आचार्य शुक्ल के नामांकन और सीमांकन की कुछ सीमाएँ भी है।
(i) आदिकाल (वीरगाथा काल) : संवत!-->!-->!-->…
हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा
हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने की परंपरा का आरंभ 19वीं सदी से माना जाता है। यद्यपि 19वीं सदी से पूर्व विभिन्न कवियों और लेखकों द्वारा अनेक ऐसे ग्रन्थों की रचना हो चुकी थी जिनमें हिन्दी के विभिन्न कवियों के जीवन वृत्त एवं कृतियों का परिचय!-->…
घुसपैठिए (कहानी) : ओमप्रकाश बाल्मिकी PDF
लेखक : ओमप्रकाश वाल्मीकि
मेडिकल कॉलेज के छात्र सुभाष सोनकर की खबर से शहर की दिनचर्या पर कोई फर्क नहीं पड़ा था। अखबारों ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था। एक ही साल में यह दूसरी मौत थी मेडिकल कॉलेज में। फाइनल वर्ष की सुजाता की मौत को!-->!-->!-->…
दोपहर का भोजन (कहानी) : अमरकांत PDF
लेखक : अमरकांत
सिद्धेश्वरी ने खाना बनाने के बाद चूल्हे को बुझा दिया और दोनों घुटनों के बीच सिर रखकर शायद पैर की उँगलियाँ या ज़मीन पर चलते चींटे - चींटियों को देखने लगी। अचानक उसे मालूम हुआ कि बहुत देर से उसे प्यास लगी है। वह मतवाले की!-->!-->!-->…
वापसी (कहानी) : उषा प्रियंवदा PDF
लेखिका : उषा प्रियंवदा
गजाधर बाबू ने कमरे में जमा सामान पर एक नज़र दौड़ाई-दो बक्स, डोलची, बालटी–“यह डिब्बा कैसा है, गनेशी?” उन्होंने पूछा। गनेशी बिस्तर बाँधता हुआ, कुछ गर्व, कुछ दुःख, कुछ लज्जा से बोला-“घरवाली ने साथ को कुछ बेसन के!-->!-->!-->…
वारिस(कहानी) : मोहन राकेश PDF
लेखक: मोहन राकेश
घड़ी में तीन बजते ही सीढ़ियों पर लाठी की खट्-खट् होने लगती और मास्टरजी अपने गेरुआ बाने में ऊपर आते दिखायी देते. खट्-खट् आवाज़ सुनते ही हम भागकर बैठक में पहुंच जाते और अपनी कापियां और किताबें ठीक करते हुए ड्योढ़ी की!-->!-->!-->…
चीफ़ की दावत (कहानी) : भीष्म साहनी PDF
लेखक : भीष्म साहनी
शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा बनाए मुँह पर फैली हुई सुर्खी और पाउडर को मले और मिस्टर शामनाथ सिगरेट पर सिगरेट फूँकते हुए चीज़ों की फ़ेहरिस्त!-->!-->!-->…
तीसरी कसम (कहानी): फणीश्वरनाथ रेणु PDF
लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु
हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है….
पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन । बैलगाड़ी। सीमा के उस पार मोरंग राज नेपाल से धान और लकड़ी ढो चुका है। कंट्रोल के जमाने में चोरबाजारी का माल इस पार से उस पार!-->!-->!-->!-->!-->…