हिंदी साहित्य की ओर एक कदम।
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सिद्ध, नाथ एवं जैन साहित्य

सिद्ध साहित्य सिद्ध साहित्य से हमारा तात्पर्य वजयान परंपरा के उन सिद्धाचार्यों के साहित्य से है, जो अपभ्रंश के दोहे तथा चर्यापद के रूप में उपलब्ध है। सिद्धों ने प्रबंध काव्य और खंडकाव्य के स्थान पर गीति और मुक्तक काव्य में रचना की

हिन्दी साहित्य: काल विभाजन और नामकरण

हिन्दी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण सामान्यतः आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के इतिहास से ही ग्रहण किया जाता है। आचार्य शुक्ल के नामांकन और सीमांकन की कुछ सीमाएँ भी है। (i) आदिकाल (वीरगाथा काल) : संवत

हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा

हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने की परंपरा का आरंभ 19वीं सदी से माना जाता है। यद्यपि 19वीं सदी से पूर्व विभिन्न कवियों और लेखकों द्वारा अनेक ऐसे ग्रन्थों की रचना हो चुकी थी जिनमें हिन्दी के विभिन्न कवियों के जीवन वृत्त एवं कृतियों का परिचय

घुसपैठिए (कहानी) : ओमप्रकाश बाल्मिकी PDF

लेखक : ओमप्रकाश वाल्मीकि मेडिकल कॉलेज के छात्र सुभाष सोनकर की खबर से शहर की दिनचर्या पर कोई फर्क नहीं पड़ा था। अखबारों ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था। एक ही साल में यह दूसरी मौत थी मेडिकल कॉलेज में। फाइनल वर्ष की सुजाता की मौत को

वापसी (कहानी) : उषा प्रियंवदा PDF

लेखिका : उषा प्रियंवदा गजाधर बाबू ने कमरे में जमा सामान पर एक नज़र दौड़ाई-दो बक्स, डोलची, बालटी–“यह डिब्बा कैसा है, गनेशी?” उन्होंने पूछा। गनेशी बिस्तर बाँधता हुआ, कुछ गर्व, कुछ दुःख, कुछ लज्जा से बोला-“घरवाली ने साथ को कुछ बेसन के

चीफ़ की दावत (कहानी) : भीष्म साहनी PDF

लेखक : भीष्म साहनी शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा बनाए मुँह पर फैली हुई सुर्खी और पाउडर को मले और मिस्टर शामनाथ सिगरेट पर सिगरेट फूँकते हुए चीज़ों की फ़ेहरिस्त

तीसरी कसम (कहानी): फणीश्वरनाथ रेणु PDF

लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है…. पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन । बैलगाड़ी। सीमा के उस पार मोरंग राज नेपाल से धान और लकड़ी ढो चुका है। कंट्रोल के जमाने में चोरबाजारी का माल इस पार से उस पार

पंच परमेश्वर (कहानी) : मुंशी प्रेमचंद PDF

लेखक: मुंशी प्रेमचंद 1 जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर

उसने कहा था: चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी

लेखक: चंद्रधर शर्मा गुलेरी बड़े-बडे़ शहरों के इक्के-गाड़ी वालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बम्बू कार्ट वालों की बोली का मरहम लगाएं। जबकि बड़े शहरों की चौड़ी सड़कों पर

हिन्दी भाषा का विकास: आदिकालीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक हिन्दी

प्रारंभिक हिन्दी परिचय: हिन्दी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना गया है। सामान्यत: प्राकृत की अन्तिम अवस्था अपभ्रंश से ही हिन्दी साहित्य का अविर्भाव स्वीकार किया जाता है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं