हिंदी साहित्य की ओर एक कदम।
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B.A. (Hons.) Hindi

भाषा की परिभाषा एवं स्वरूप

प्र. भाषा की परिभाषा बताते हुए उसके स्वरूप को स्पष्ट करें। उ. मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में भाषा को भी शामिल किया जाता रहा है। भावों की अभिव्यक्ति के लिए भाषा की

भाषा-विज्ञान की उपयोगिता

प्र. भाषा-विज्ञान की उपयोगिता। उ. सामान्य और बेहद आम प्रचलित भाषा में करें तो भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन जिस शास्त्र के अंतर्गत किया जाता है, उसे ही भाषा-विज्ञान कहा

जबान (निबंध) : बालकृष्ण भट्ट

कहने को मनुष्य के शरीर में 5 इंद्रियाँ हैं और यह पुतला उन्हीं 5 कर्मेंद्रियों का बना है किंतु उन उन इंद्रियों का प्राबल्य केवल अपने विषय में है अपना विषय छोड़ दूसरे के विषय में वे कुछ अधिकार नहीं रखतीं जैसा कर्णेद्रिय का अधिकार शब्द पर है

भक्तिकाल की दार्शनिक पृष्ठभूमि

हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल संवत 1375 से संवत 1700 तक माना जाता है। यह हिन्दी साहित्य का श्रेष्ठ युग है। समस्त हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ कवि और उत्तम रचनाएँ इस युग में प्राप्त होती है। इस युग के परिप्रेक्ष्य पर विचार करते समय इतिहासकारों का

सगुण भक्ति धारा: राम, कृष्ण काव्य

सगुण : रामभक्ति काव्यधारा भक्ति की सगुण शाखा में उपासक भगवान के सगुण और निर्गुण दोनों ही रूपों को देखता है। पर उपासना सुविधा के लिए वह सगुण रूप को ही प्रधानता देता है, जो अपनी साकार लीलाओं द्वारा लोकजीवन में व्याप्त हो सके। सगुण में

भक्ति आंदोलन और उसका अखिल भारतीय स्वरूप

भक्ति आंदोलन उद्भव और विकास भक्ति आंदोलन का उद्भव हिन्दी साहित्येतिहास के सर्वाधिक विवादास्पद प्रसंगों में से एक है। पूर्व मध्यकाल में जिस भक्ति धारा ने अपने आन्दोलनात्मक सामर्थ्य से समूचे राष्ट्र की शिराओं में नया रक्त प्रवाहित किया,

रासो काव्य

रासो काव्य की पृष्ठभूमि रासो काव्य से हमारा तात्पर्य आदिकालीन साहित्य की वीरगाथात्मक कृतियों से है। आदिकालीन साहित्य में रास ग्रंथ और रासो ग्रंथ दोनों प्रकार की रचनाओं की चर्चा मिलती है। रास साहित्य और रासो साहित्य का मुख्य अंतर

सिद्ध, नाथ एवं जैन साहित्य

सिद्ध साहित्य सिद्ध साहित्य से हमारा तात्पर्य वजयान परंपरा के उन सिद्धाचार्यों के साहित्य से है, जो अपभ्रंश के दोहे तथा चर्यापद के रूप में उपलब्ध है। सिद्धों ने प्रबंध काव्य और खंडकाव्य के स्थान पर गीति और मुक्तक काव्य में रचना की

हिन्दी साहित्य: काल विभाजन और नामकरण

हिन्दी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण सामान्यतः आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के इतिहास से ही ग्रहण किया जाता है। आचार्य शुक्ल के नामांकन और सीमांकन की कुछ सीमाएँ भी है। (i) आदिकाल (वीरगाथा काल) : संवत

हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा

हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने की परंपरा का आरंभ 19वीं सदी से माना जाता है। यद्यपि 19वीं सदी से पूर्व विभिन्न कवियों और लेखकों द्वारा अनेक ऐसे ग्रन्थों की रचना हो चुकी थी जिनमें हिन्दी के विभिन्न कवियों के जीवन वृत्त एवं कृतियों का परिचय