हिंदी साहित्य की ओर एक कदम।
Browsing Category

Book

कबीर के दोहे हिन्दी-‘ग’ (B.Com)

दोहे गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय॥ निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥ कबिरा संगत साधु की ज्यों गंधी का बास। जो कछु गंधी दे नहीं तौ भी बास

कविता: अकाल और उसके बाद- नागार्जुन

लेखक: नागार्जुन कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदासकई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पासकई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्तकई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बादधुआँ उठा आँगन से ऊपर कई

कविता: हमारे पूर्वज- मैथिलीशरण गुप्त

लेखक: मैथिलीशरण गुप्त उन पूर्वजों की कीर्ति का वर्णन अतीव अपार है। गाते नहीं उनके हमीं गुण, गा रहा संसार है। वे धर्म्म पर काले निछावर तृण-समान शरीर थे, उनसे वही गम्भीर थे, वर वीर थे, ध्रुव धीर थे। उनके अलौकिक दर्शनों से दूर होता

बिहारी के दोहे हिन्दी-‘क’ (B.Com)

बिहारी के निम्नलिखित दोहे B.Com(P) के ge पेपर हिन्दी-'क' में लगे हुए हैं। पद बसै बुराई जासु तन, ताही कौ सनमानु। भलौ भलौ कहि छोडियै, खोर्टें ग्रह जपु दानु ॥381॥ मरतु प्यास पिंजरा पर्यो सुआ समै कैं फेर। आदरू दै दै बोलियतु बाइसु

मीरा के पद सप्रसंग व्याख्या

मीराबाई के निम्नलिखित पद बी.कॉम प्रोग्राम के ge पेपर हिन्दी-'क' में लगे हुए हैं। पद मण थें परस हरि रे चरण॥टेक॥ सुभग सीतल कँवल कोमल, जगत ज्वाला हरण। जिण चरण प्रहलाद परस्याँ, इन्द्र पदवी धरण। जिण चरण ध्रुव अटल करस्याँ, सरण असरण सरण।

कबीर के दोहे हिन्दी-‘क'(B.Com.)

निम्नलिखित कबीर के दोहे बी.कॉम. प्रोग्राम के ge पेपर हिन्दी-'क' में लगे हुए हैं। पाछै लागा जाइ था, लोक बेद के साथि। आगै थे सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथि।।11।। दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट। पूरा किया बिसाहूणा, बहुरि न आवौ

कविता: अग्निपथ- हरिवंश राय बच्चन PDF

वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा

कविता: अरुण यह मधुमय देश हमारा- जयशंकर प्रसाद PDF

अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा॥ सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुमकुम सारा॥ लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे। उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़

भूषण कवित्त (B.Com) सप्रसंग व्याख्या

निम्नलिखित कवित्त बी.कॉम. प्रोग्राम के प्रथम वर्ष में लगे हुए हैं। इंद्र जिमि जंभ पर, बाड़व ज्यौं अंभ पर, रावन सदंभ पर रघुकुल राज है। पौन बारिवाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यों सहस्रबाहु पर राम द्विजराज है॥ दावा द्रुमदंड पर, चीता मृगझुंड

बिहारी के दोहे (B.Com)

निम्नलिखित दोहे बी.कॉम. प्रोग्राम के प्रथम वर्ष में लगे हुए हैं। बतरस-लालच लाल की, मुरली धरी लुकाइ। सौंह करें, भौंहनु हँसे, दैन कहैं नटि जाइ॥ या अनुरागी चित्त की, गति समुझे नहिं कोइ। ज्यों-ज्यों बूड़े स्याम रँग, त्यों-त्यौं उज्जलु