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भारती वन्दना : सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला Bharati Vandana Kavita
भारती वंदना (bharati vandana kavita) कविता महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित एक देशभक्ति रचना है, जो उन्होंने मान भारती के चरणों में पुष्पगुच्छ के समान समर्पित की है।
भारती, जय, विजय करेकनक - शस्य - कमल धरे!लंका पदतल!-->!-->!-->!-->!-->…
हिंदी की प्रमुख बोलियों का परिचय
1. खड़ीबोली
आधुनिक हिंदी का मानकीकृत रुप खड़ी बोली को माना जाता है। खड़ी बोली का विकास शौरसेनी अपभ्रंश के पश्चिमी हिंदी उपभाषा से हुआ है। हिन्दुस्तानी, उर्दू, दक्खिनी हिंदी का आधार भी खड़ी बोली को माना जाता है। 'खड़ी बोली' शब्द की!-->!-->!-->…
कविता : तोड़ती पत्थर – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
वह तोड़ती पत्थर;देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर—वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादारपेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;श्याम तन, भर बँधा यौवन,नत नयन प्रिय, कर्म-रत मन,गुरु हथौड़ा हाथ,करती बार-बार प्रहार :—सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।!-->!-->!-->…
DU B.A.(Hons.) Hindi Previous Year Paper Semester-II DSC PDF
Unique Paper Code2052101203Name of th PaperHindi Nibandh Evam Anya Gady VidhayeinName of the CourseB.A.(Hons.) Hindi, DSCSemesterIIDuration3 HoursMaximum Marks90
छात्रों के लिए निर्देश :
इस प्रश्न-पत्र के मिलते ही ऊपर दिए गए!-->!-->!-->!-->!-->!-->…
B.A. Prog. Hindi Syllabus, Semester-III/IV, DU Download PDF
DEPARTMENT OF HINDI
BA (Prog.) with Hindi as MAJOR सेमेस्टर III- DSC 5- क्रेडिट 4
हिंदी कथा साहित्य
Course Nature of Course Total CreditLecture TutorialPracticalEligiblity CriteriaPre-requisite of the courseहिंदी कथा!-->!-->!-->!-->!-->!-->!-->…
B.A. Prog. Hindi Syllabus, Semester-I/II, Delhi University
Discipline Specific Core-1
हिन्दी भाषा और साहित्य का इतिहास
Course Objective (2-3)
हिंदी भाषा और साहित्य के इतिहास का परिचय प्राप्त होगा।
साहित्य इतिहास के विभिन्न कालों की प्रमुख प्रवृत्तियों की आलोचनात्मक समझ विकसित होगी।
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हिन्दी भाषा का विकास: आदिकालीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक हिन्दी
प्रारंभिक हिन्दी
परिचय:
हिन्दी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना गया है। सामान्यत: प्राकृत की अन्तिम अवस्था अपभ्रंश से ही हिन्दी साहित्य का अविर्भाव स्वीकार किया जाता है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं!-->!-->!-->!-->!-->…
रीतिकाल: प्रमुख प्रवृत्तियाँ|| रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त, रीतिबद्ध काव्य।
रीतिबद्ध काव्य
रीतिबद्ध काव्य मुख्यतः शास्त्रीय स्वरूप के उद्घाटन में नियोजित था। जिसके परिणाम स्वरूप उसमें विभिन्न काव्यरीतियों का बंधन पाया जाता है। यह काव्यधारा उन कवियों की है जिन्होंने लक्षण ग्रंथों की परिपाटी पर!-->!-->!-->…
आदिकाल: काल विभाजन और नामकरण|| उद्भव और विकास
आदिकाल
हिन्दी साहित्य के इतिहास के प्रथम चरण को जॉर्ज ग्रियर्सन अपनी पुस्तक "The Modern Vernacular Literature of Hindustan" में चारण काल कहकर संबोधित करते हैं, वे इस काल की आरंभिक सीमा को 643 ई. मानते हैं। लेकिन वे विभाजन और नामकरण के!-->!-->!-->!-->…
बादल को घिरते देखा है : नागार्जुन (व्याख्या) badal ko ghirte dekha hai
कविता "बादल को घिरते देखा है" (badal ko ghirte dekha hai) नागार्जुन के कविता संग्रह "युगधारा" से ली गई है। इस कविता में नागार्जुन ने प्रकृति का अति मनमोहक वर्णन किया है जिसमें उन्होंने बादलों को केंद्र में रखा है। इसमें उन्होंने बादल के!-->…