हिंदी साहित्य की ओर एक कदम।

आषाढ़ का एक दिन : मोहन राकेश (ashadh ka ek din)

प्रश्न : रंगमंचीय संभावनाओं की दृष्टि से किए गए एक प्रयोग के रूप में 'आषाढ का एक दिन' नाटक पर विचार कीजिए। उत्तर : नाटक की भूमिका में मोहन राकेश लिखते हैं कि 'हिन्दी रंगमन्च को हिन्दी भाषी प्रदेश की सांस्कृतिक पूर्तियों और आकांक्षाओं का

विद्यापति की भक्ति भावना (vidyapati ki bhakti bhavna)

प्रश्न: वि‌द्यापति की कविता में व्यक्त भक्ति स्वरूप को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। उत्तर :- आदिकाल में उभरते कवि वि‌द्यापति की कविता में भक्ति तत्व की वि‌द्यमानता बहस का विषय रही है। आ. शुक्ल उनकी आध्यात्मिकता पर कटाक्ष करते है तो वहीं

आदिकालीन प्रवृत्तियाँ एवं डिंगल-पिंगल का भेद (aadikal ki pravritiyan)

प्रश्न- आदिकालीन हिन्दी भाषा की प्रमुख प्रवृत्तियों का परिचय देते हुए डिंगल और पिंगल का अंतर स्पष्ट कीजिए। (aadikal ki pravritiyan) उत्तर:- आदिकालीन हिन्दी भाषा भिन्न-भिन्न चरणों में विकसित होती रही जो कहीं प्राकृताभास अपभ्रंश में दिखाई

Beimani ki Parat बेईमानी की परत : हरिशंकर परसाई

"बेईमानी की परत" (Beimani ki Parat) हरिशंकर परसाई द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध व्यंग्य निबंध है। यह निबंध समाज में व्याप्त बेईमानी और भ्रष्टाचार पर तीखा कटाक्ष करता है। हरिशंकर परसाई ने इस निबंध में बेईमानी के विभिन्न रूपों और उसे छिपाने के

Akal Utsav अकाल-उत्सव : हरिशंकर…

हरिशंकर परसाई का "अकाल उत्सव" (Akal Utsav) एक शक्तिशाली और विचारोत्तेजक व्यंग्यात्मक निबंध है। यह निबंध अकाल की कठोर वास्तविकता और उसके चारों ओर के विकृत उत्सव को दर्शाता है। यह निबंध बहुत ही स्पष्टता से बताता है कि समाज में, जहाँ एक ओर

Viklang Shraddha Ka Daur विकलांग श्रद्धा का दौर : हरिशंकर…

"विकलांग श्रद्धा का दौर" (Viklang Shraddha Ka Daur) हिंदी के विख्यात साहित्यकार हरिशंकर परसाई द्वारा रचित एक प्रसिद्ध व्यंग्य है। यह व्यंग्य राजनीतिक और सामाजिक भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करता है और इसमें हरिशंकर परसाई ने अपनी रचनात्मक

Thithurta Hua Gantantra ठिठुरता हुआ गणतंत्र : हरिशंकर परसाई

'ठिठुरता हुआ गणतंत्र' (thithurta hua gantantra) हरिशंकर परसाई के महत्वपूर्ण व्यंग्यों में से एक है। इसके ज़रिए परसाई ने भारत के गणतंत्र और रोब-दाब तथा ठाट-बाट वाली राज व्यवस्था पर गहरी चोट की है। गणतंत्र दिवस पर दिखाई जाने वाली झांकियों और

Sudama Ke Chawal सुदामा के चावल (व्यंग्य) : हरिशंकर…

"सुदामा के चावल" (Sudama Ke Chawal) हरिशंकर परसाई द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध व्यंग्य है। यह कहानी सुदामा और कृष्ण के बीच की मित्रता पर आधारित है, लेकिन इसे वर्तमान समय के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ भ्रष्टाचार और स्वार्थ की

Kar Kamal Ho Gaye कर कमल हो गए : हरिशंकर परसाई

'कर कमल हो गए' (kar kamal ho gaye by harishankar parsai) हिन्दी साहित्य के मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई द्वारा रचित एक व्यंग्यात्मक निबंध है जिसका पाठ नीचे दिया गया है। पिछले महीने से अपने हाथ भी कमल हो गये हैं। मेरे पास तीन कॉलिजों

Dadi Amma Kahani दादी-अम्मा: कृष्णा सोबती

कृष्णा सोबती की कहानी "दादी अम्मा" (Dadi Amma Kahani) में, लेखिका ने एक वृद्ध महिला (दादी अम्मा) के उपेक्षित जीवन और उनकी व्यथा का वर्णन किया है। कहानी में, दादी अम्मा एक भरे-पूरे परिवार (पति, बेटे-बहू, पोते-पोतियां, आदि) के साथ होते हुए