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भूषण कवित्त (B.Com) सप्रसंग व्याख्या

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निम्नलिखित कवित्त बी.कॉम. प्रोग्राम के प्रथम वर्ष में लगे हुए हैं।

इंद्र जिमि जंभ पर, बाड़व ज्यौं अंभ पर,
रावन सदंभ पर रघुकुल राज है।
पौन बारिवाह पर, संभु रतिनाह पर,
ज्यों सहस्रबाहु पर राम द्विजराज है॥
दावा द्रुमदंड पर, चीता मृगझुंड पर,
भूषण बितुंड पर जैसे मृगराज हैं।
तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर,
त्यों मलेच्छ बंस पर सेर सिवराज है।

साजि चतरंग सैन अंग में उमंग धरि
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है।
भूषण भनत नाद विहद नगारन के
नदी-नद मद गैरबरन के रलत है
ऐल-फैल खेल-मैल खलक में गैल-गैल
गजन की ठैल-पैल सैल उसलत है
तारा सो तरनि धूरि-धारा में लगत जिमि
धारा पर पारा पारावार यों हलत है॥

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